धनतेरस पर पूजा करने का विशेष महत्त्व है. इस दिन भगवान विष्णु के अंश धन्वंतरि जी समुद्र से अमृत कलश के साथ प्रगट हुए थे, इसीलिए उनकी जयंती के दिन अपने परिवार की रोग मुक्त रखने की कामना से धनतेरस के दिन धन्वंतरि जी की पूजा का बहुत महत्त्व है. धनतेरस के दिन माता लक्ष्मी जी का आगमन भी होता है, इसी लिए माता लक्ष्मी जी के स्वागत के लिए भी इस दिन विशेष पूजा की जाती है.
धनतेरस पर धन्वंतरि, लक्ष्मी, कुबेर जी की पूजा विधि -
धनतेरस के दिन सुबह उठकर घर, कार्य स्थल, दुकान की साफ़ सफाई करनी चाहिए. इसके बाद स्नान आदि से निवृत्त होने के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करें.
घर के मुख्य द्वार पर इस दिन रंगोली बनाये और माता लक्ष्मी के पदचिन्ह बनाकर, दरवाजे पर वंदनवार लगाए.
इसके बाद मंदिर की सफाई करें और सूर्य देव को जल अर्पित करें.
धनतेरस के दिन संध्या काल में एक चौकी पर मां लक्ष्मी, गणेश जी, भगवान धन्वंतरि और कुबेर जी की प्रतिमा को विराजमान करें, प्रतिमा का मुख उत्तर की ओर रखे.
एक तांबे के कलश में एक रूपये के सिक्के भरकर माता लक्ष्मी को अर्पित करे.
इसके बाद दीपक जलाकर सभी को चंदन का तिलक लगाएं और आरती करें. आरती के बाद भोग लगाएं कुबेर जी को सफेद मिठाई, धन्वंतरि जी को पीली मिठाई तथा माँ लक्ष्मी जी और गणेश जी को फल तथा मिठाई अर्पण करे.
जो बर्तन या वस्तु धनतेरस के अवसर पर खरीदी हो उसे अर्पण करे. कुबेर जी के मंत्र ॐ ह्रीं कुबेराय नमः का 108 बार जप करें.
धन्वंतरि स्तोत्र का पाठ करें. धन्वंतरि देव मंत्र - ॐ नमो भगवते धन्वंतराय विष्णुरूपाय नमो नमः
कुबेर देवता से सुख समृद्धि और भगवान धन्वंतरि से अपने परिवार के स्वास्थ्य और रोगो से मुक्ति की प्रार्थना करे. माता लक्ष्मी जी का आवाहन करे तथा पूरे साल आपके घर में विराजने की कामना करे.
यम दीप दान की विधि -
यम दीप दान धनतेरस के दिन प्रदोषकाल में किया जाता है. यह एक महत्वपूर्ण प्रथा है, जो अकाल मृत्यु के भय से मुक्ति प्रदान करती है.
गेहूं के आटे का एक चौमुखा दीपक बना ले, गेहूं के आटे में अकाल मृत्यु और तमो गुणी तरंगो को शांत करने की क्षमता होती है.
इसके बाद रुई की दो बड़ी बातियाँ बना ले तथा दिए में इस प्रकार रखे कि बाती चार मुखों से बाहर निकले तथा दिया चौमुखा दिखाई दे. अब इस दिये को सरसों या तिल का तेल भर दे तथा साथ ही उसमे थोड़े काले तिल भी डाल दे.
रोली अक्षत तथा पुष्पों से दिये की पूजा करे. अब घर के मुख्य दरवाजे पर गेहूं या खील की एक ढेरी लगाए तथा दिये को प्रज्वलित करके दक्षिण दिशा की तरफ मुँह करके इस चौमुखी दिए को उस गेहूं या खील की देरी पर रख दे.
ॐ यमदेवाय नमः का उच्चारण करते हुए दक्षिण दिशा की तरफ नमन करे.