chat boat of google named as bard in artificial intelligence

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की दुनिया में गूगल का चैट बाट बार्ड

जैसा कि हम जानते हैं, आने वाले समय में आर्टिफिशल इंटेलिजेंस का बहुत महत्त्वपूर्ण प्रयोग होने जा रहा है। जिस प्रकार आज के समय में बिना गूगल के किसी भी विषय को जानना समझना लगभग नामुमकिन सा है। आजकल हर कोई प्रश्नों के उत्तर ढूंढने के लिए गूगल और यूट्यूब की सहायता लेता ही है, इसी प्रकार से आने वाले समय में एआई की सहायता से सभी कार्य किए जाने की निश्चित संभावना है।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की इस दुनिया में चैट जीपीटी अपने कदम जमा चुका है, ऐसे में गूगल ने भी बार्ड नामक अपने चेटबोट को लॉन्च कर दिया है। बार्ड का मतलब वह व्यक्ति है जो शायरी लिख सकता है, कविता लिख ​​सकता है, यानि कि एक कवि है।

आईटी की दुनिया की दोनों दिग्गज कंपनियां, यानी कि माइक्रोसॉफ्ट और गूगल अपने-अपने प्रोडक्ट क्रमशः चैट जीपीटी और बार्ड को लॉन्च करके एक बार फिर से प्रतिद्वंद्विता में आ चुके है। गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई ने अपने एक ब्लॉक पोस्ट के जरिये लोगों को एआई की मदद से संवाद करने वाली सुविधा बार्ड की जानकारी दी। जहाँ गूगल बार्ड को लेकर आया है वहीँ माइक्रोसॉफ्ट द्वारा पहले से ही ओपन एआई की चैट जीपीटी को विकसित किया जा चुका है।

अब अगर हम बात करें बार्ड की तो गूगल की ओर से लाइ गई यह सुविधा उसी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टेक्नोलॉजी की सहायता से बनाई गई है। जिसे विकसित करने में लम्बडा नाम दिया गया था और गूगल के एक पूर्व कर्मचारी ब्लैक लिमोन ने इससे अपने प्रयोगात्मक संवाद को काफी संवेदनशिल करार दिया था। यहां यह जनना आवश्यकक होगा कि ब्लैक लिमोन ने ही ऐ आई को विकसित किया था, जब लिमोन ने लम्बडा के साथ अपनी चैट को सार्वजनिक करते हुए इसे संवेदनशिल बताया तो गूगल ने उन्हें नौकरी से निकला दिया था।

आर्टिफिशल इंटेलिजेंस की इस दौड़ में एक और नाम काफी चर्चित है जिसका जिक्र करना अति आवश्यक है और वह नाम है एंट्रोपिक। एंट्रोपिक गूगल के पूर्व कर्मचारियों द्वारा बनायी गयी एक कंपनी है जिसे बहुत कम लोग जानते हैं। हांलाकि जब से गूगल ने एंट्रोपिक में निवेश करने की घोषणा की है, तब से यह काफी चर्चा में है। गूगल और एंट्रोपिक के बीच में हुए समझोते के मुताबिक गूगल अपने निवेश के बदले 10% की हिस्सेदारी मांगी है। रिपोर्ट के मुताबिक इस समझौते में गूगल द्वारा एंट्रोपिक में 400 मिलियन डॉलर यानी की तकरीबन 32 अरब रुपये का निवेश किया जाएगा।

जिस प्रकार गूगल और एंट्रोपिक एक साझेदारी करने जा रहे हैं, वैसा ही कुछ माइक्रोसॉफ्ट और चैट जीपीटी के निर्मता ओपन एआई के बीच भी हुआ था, जहां एक और ओपन ए आई, चैट जीपीटी में अपनी रिसर्च स्पेशलिस्टी देता है तो माइक्रोसॉफ्ट चैट जीपीटी के डेवलपमेंट के लिए भारी निवेश के साथ ही अपने विशाल क्लाउड प्लेटफॉर्म को भी उपलब्ध कराता है।

ऐ आई की इस बड़ी परियोजना को सफल बनाने में क्लाउड सर्विसेज का एक महत्त्वपूर्ण योगदान माना जा रहा है। गूगल द्वारा एंथ्रोपिक में निवेश की खबर से कुछ दिन पूर्व ही माइक्रोसॉफ्ट ने ओपन एआई में 10 अरब डॉलर के निवेश की बात कहीं थी।

यहां यह जनना अत्यंत आवश्यकता है कि एंट्रोपिक बार्ड के साथ क्लौड नाम से एक चैट बॉक्स विकसित कर रहा है जिसे आने वाले भविष्य में चैट जीपीटी का प्रतिद्वंदी माना जा रहा है हांलांकि अभी इस विषय में कुछ संशय है कि क्या गूगल भी अपने प्लेटफॉर्म पर बार्ड को उसी प्रकार इस्तमाल करेगा जिस प्रकार माइक्रोसॉफ्ट चैट जीपीटी का कर रहा है क्योंकि इसके अलावा भी गूगल अपने स्तर से एआई से जुड़े काई प्रोजेक्टों पर काम कर रहा है।

ग्लोबल मार्केट में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस बहुत तेजी से प्रगति कर रहा है गूगल, माइक्रोसॉफ्ट और मेटा, आई टी की दुनिया की तीनो बड़ी कंपनियां दुनिया में पूरी प्रतिद्वंद्विता कर रही है।

2023 की शुरुआत में ही गूगल ने अपने AI चैटबॉट बार्ड का अनावरण किया था। जिसके बाद गूगल के जनरेटिव AI विकास से जुड़े कई प्रमुख अनाउंसमेंट उसके वार्षिक इवेंट Google I/O 2023 में की गयी।

गूगल ने अपने वार्षिक इवेंट Google I/O 2023 की शुरुआत में ही AI पर विस्तार से बात की जिससे यह साफ़ हो गया था कि गूगल के लिए AI कितना महत्त्वपूर्ण है। इस इवेंट के समय गूगल बार्ड को कंपनी द्वारा 180 देशों के लिए जारी कर दिया गया और जिसमें जेपनीस और कोरियन भाषा में इससे सवाल-जवाब और इसका उपयोग महत्वपूर्ण विषय था। साथ ही इस इवेंट में गूगल ने सन्देश दिया था कि जल्द ही बार्ड में 14 अन्य नयी भाषाएं भी फीड की जाएंगी।

गूगल बार्ड पर विजुअल्स के माध्यम से भी सवाल-जवाब किये जा सकते हैं। साथ ही गूगल ने निर्देश दिए कि जल्द ही इसमें गूगल लेंस टेक्नोलॉजी को भी कंपनी द्वारा जोड़ा जाएगा, जिसके बाद यह फोटो को पहचान कर यूजर के लिए कैप्शन तैयार करने में भी सक्षम हो जाएगा।

गूगल का ये लोकप्रिय AI टूल बार्ड अब तक 20 से ज्यादा प्रोगरामिंग लैंग्वेज के लिए लांच किया जा चुका है और यह सॉफ्टवयेर इंजीनियर्स के लिए विभिन्न प्रकार से सहायक सिद्ध हो रहा है। बार्ड के प्रयोग से इसके यूजर्स अब परिणामों को आसानी से जीमेल या डॉक्स फाइल में एक्सट्रेक्ट कर सकेंगे।

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