भानवी सिंह वाइफ ऑफ राजा भैया बस्ती के राजघराने की राजकुमारी है. भानवी सिंह का जन्म 10 जुलाई 1974 को हुआ था. बस्ती के राजा के छोटे बेटे कुंवर रवि प्रताप सिंह की बेटी भानवी सिंह 4 बहनों में तीसरे नंबर की बेटी हैं. भानवी सिंह की प्रारंभिक शिक्षा बस्ती में ही हुई थी, आठवीं तक की पढ़ाई भानवी सिंह ने बस्ती के सेंट जोसेफ स्कूल से पूरी की. उसके बाद आगे की पढ़ाई पूरी करने के लिए भानवी अपनी मां मंजूला सिंह के साथ लखनऊ चली गयी थी.
भानवी सिंह की शादी प्रतापगढ़ के राजपूत और भदरी रियासत के राजा उदय प्रताप सिंह के बेटे कुंवर रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया से 17 फरवरी, सन 1995 में हुई थी. रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया की बारात बस्ती के राज महल में आई थी. इसके बाद राजघराने के पुरोहितों ने विधि विधान से भानवी सिंह और राजा भैया के शादी कराई थी.
भावनी सिंह के पति रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया, प्रतापगढ़ के कुंडा बेती के रहने वाले है. कुंडा हो या यूपी दोनों ही जगह प्रतापगढ़ के कुंडा बेती के रहने वाले राजा भैया ने काफी नाम कमाया है.
सन 1993 से लगातार कुंडा विधानसभा से निर्दलीय विधायक रहे राजा भैया, बेती और भदरी राजमहल के राजकुमार भी हैं. यूपी सरकार में राजा भैया जेल और खाद्य मंत्री रह चुके हैं.
सन 1996 में शादी के बाद भानवी सिंह ने दो जुड़वा बेटियों को जन्म दिया, जिनमें से एक की मृत्यु हो गई थी. इसके बाद सन 1997 में भानवी सिंह ने और एक बेटी को जन्म दिया. सन 2003 में भानवी सिंह ने दो जुड़वा बेटों शिवराज और बृजराज को जन्म दिया. भानवी सिंह की बेटियों का नाम राघवी और बृजेश्वरी है.
भानवी सिंह ने सन 2024 में जोर बाग थाने में एफआईआर दर्ज कराते हुए एमएलसी अक्षय प्रताप सिंह पर गंभीर आरोप लगाए थे. जबकि राजा भैया, एमएलसी अक्षय प्रताप सिंह को अपना भाई मानते हैं. भानवी सिंह ने अक्षय प्रताप सिंह पर ईओडब्ल्यू में वित्तीय अनियमितता को लेकर एक केस दर्ज कराया था.
दरसअल भानवी सिंह और अक्षय प्रताप सिंह एक कंपनी को साथ में मिलाकर चला रहे थे. जिसमें भानवी का आरोप है कि अक्षय प्रताप ने उनके फर्जी हस्ताक्षर कर उस कंपनी के ज्यादातर शेयरों पर अपना कब्ज़ा कर लिया.
कुछ लोगो का ऐसा मानना है कि एमएलसी अक्षय प्रताप सिंह पर भानवी सिंह के इस केस के बाद, उनके अपने पति राजा भैया से भी रिश्तों में गर्मी आ गयी थी. हालांकि, भानवी सिंह और राजा भैया इंकार करते रहे है.
भानवी सिंह और राजा भैया के रिश्तों में राजा भैया के कोलकाता की एक टीवी पत्रकार से कथित तौर पर नजदीकियों से भी गर्मी है. सन 2015-16 के दिनो में इनके वैवाहिक जीवन में काफी उथल पुथल मची हुई थी.
भानवी सिंह वाइफ ऑफ़ जनसत्ता दल (लोकतांत्रिक) के अध्यक्ष और राजनीतिज्ञ बाहुबली राजा भैया, अक्टूबर 2024 में भी सुर्ख़ियों में आयी थी, जब उत्तराखंड की तत्कालीन धामी सरकार ने उनके नाम की जमीन कानूनी कार्यवाही के बाद आखिरकार अपने कब्जे में ले ली थी.
नैनीताल में नीम करोली बाबा के कैंची धाम के पास बेतालघाट के सिल्टोना में भावनी सिंह के नाम पर उनके पति तत्कालीन उत्तरप्रदेश के कुंडा से विधायक रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया ने सन 2007 में 27.5 नाली भूमि स्थानीय निवासी आनंद बल्लभ से खरीदी गयी थी. नाली उत्तराखंड और हिमालयी क्षेत्रों में प्रयोग की जाने वाली एक भूमि की माप इकाई है.
कैंचीधाम के निकट स्थित इस जमीन को लेकर काफी लंबे समय से कानूनी विवाद चल रहा था. एक लंबे समय से विवाद का हिस्सा रही इस जमीन का मामला राजस्व बोर्ड और आयुक्त न्यायालय में विचाराधीन था.
दरसअल उत्तराखंड में भू-कानून को लेकर राज्य सरकार सन 2024 में काफी सश्क्त हो गयी, तब कैंची धाम के एसडीएम वीसी पंत ने तहसील के क्षेत्र में खरीदी गई जमीनों की जांच का कैम्पेन चलाया गया था. इसी दौरान नैनीताल जिले के बेतालघाट ब्लॉक में प्रशासन ने एक बड़ी कार्यवाही करते हुए बेतालघाट ब्लॉक के सिल्टोना में भावनी सिंह पत्नी उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले के तत्कालीन विधायक रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया के नाम पर सन 2007 से काबिज 27.5 नाली भूमि पर राजस्व विभाग के अधिकारियों ने अक्टूबर 2024 में कब्जा कर लिया था और उत्तराखंड की राज्य सरकार को सौंपा था.
सन 2007 से 2024 तक एक लंबे कालखंड के समय तक इस लगभग 0.555 हेक्टेयर भूमि में किसी प्रकार की खेतीबाड़ी संबंधी कोई भी कार्य नहीं किया गया, जिसके चलते अक्टूबर 2024 में तत्कालीन पटवारी रवि पांडेय ने क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों के साथ जमीन का मौका निरिक्षण किया.
इसके बाद जेडएएलआर एक्ट 1950 की धारा 154 (4) (3) (ख) का उल्लंघन होना पाया जाने पर, जमीन पर लंबे समय से किसी तरह का कोई कृषि कार्य नहीं होने के चलते जमीन को धारा 167 के अंतर्गत उत्तराखंड की राज्य सरकार को 25 जून 2024 की तिथि में निहित की गई कार्यवाही को सही पाया और पटवारी ने अक्टूबर 2024 में प्रतिनिधियों की उपस्थिति में जमीन पर नैनीताल प्रशासन उत्तराखंड सरकार का कब्जा करा दिया गया.