rssb chief jasdeep singh gill

आरएसएसबी प्रमुख जसदीप सिंह गिल

जसदीप सिंह गिल को 2 सितम्बर 2024 को राधा स्वामी सत्संग ब्यास सोसाइटी का संरक्षक और संत सतगुरु नामित किया गया. इसके तत्कालीन प्रमुख गुरिंदर सिंह ढिल्लों ने उन्हें अपना उत्तराधिकारी मनोनीत किया.

इसके बाद जसदीप सिंह गिल फार्मास्युटिकल कंपनी सिप्ला लिमिटेड के हेड स्ट्रैटेजिस्ट और सीनियर मैनेजर के पद से इस्तीफा दे दिया, जहां वह सन 2019 से 31 मई, 2024 तक कार्यरत रहे. साथ ही वह बोर्ड ऑब्जर्वर के रूप में एथरिस और अचिरा लैब्स प्राइवेट लिमिटेड से भी जुड़े थे. मार्च 2024 तक, जसदीप सिंह गिल वेल्थी थेरेप्यूटिक्स के बोर्ड सदस्य भी थे. इससे पहले, उन्होंने रैनबैक्सी में सीईओ के कार्यकारी सहायक और कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी एंटरप्रेन्योर्स में अध्यक्ष के रूप में भी काम किया है.

कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय से केमिकल इंजीनियरिंग में पीएचडी करने वाले जसदीप सिंह गिल ने एक्सचेंज प्रोग्राम के तहत मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से केमिकल इंजीनियरिंग में मास्टर डिग्री भी ली हुई है. भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, दिल्ली से बायोकेमिकल इंजीनियरिंग और बायोटेक्नोलॉजी में ग्रेजुएशन करने वाले जसदीप सिंह गिल ने यही से मास्टर्स भी की हुई है. 

भारत के पंजाब प्रान्त में अमृतसर के निकट ब्यास नदी के तट पर स्थित मुख्यालय वाले आध्यात्मिक संगठन राधा स्वामी सत्संग ब्यास आरएसएसबी ने सोमवार, 2 सितम्बर 2024 को घोषणा की थी कि इसके तत्कालीन प्रमुख गुरिंदर सिंह ढिल्लों ने कैम्ब्रिज से केमिकल इंजीनियरिंग में डॉक्टरेट और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान आईआईटी, दिल्ली के पूर्व छात्र जसदीप सिंह गिल को 45 वर्ष की उम्र में तत्काल प्रभाव से राधा स्वामी सत्संग ब्यास सोसाइटी का संरक्षक  नामित किया था.
  
साथ ही बाबा गुरिंदर सिंह ढिल्लों ने संत सतगुरु के रूप में उन्हें नाम दीक्षा देने का अधिकार भी दिया और कहा कि जिस तरह उनके गुरु हुजूर महाराज जी के बाद उन्हें संगत का पूरा समर्थन और प्यार मिला है, उन्होंने सभी अनुयायियों से इच्छा और अनुरोध किया है कि जसदीप सिंह गिल को भी संरक्षक और सतगुरु के रूप में वही प्यार और स्नेह दिया जाए.

बाबा गुरिंदर सिंह ढिल्लों से पहले उनके चाचा चरण सिंह जी ब्यास डेरा के प्रमुख थे, जबकि जसदीप सिंह गिल, बाबा गुरिंदर सिंह ढिल्लों की मौसी के पोते हैं.

जसदीप सिंह गिल राधा स्वामी सत्संग ब्यास के छठे आध्यात्मिक प्रमुख हैं, जयमल सिंह इसके पहले प्रमुख थे, जिसके बाद क्रमशः सावन सिंह, जगत सिंह, चरण सिंह और गुरिंदर सिंह ढिल्लों ब्यास डेरे के प्रमुख रहे है.

आर एस एस बी डेरा की स्थापना भारत में सन 1891 में हुई थी जिसकी आज, लगभग 100 देशों में शाखाएँ हैं. डेरा की शिक्षाओं का केंद्र एक आध्यात्मिक गुरु रहता है जो मानव जीवन के उद्देश्य को समझाता है और दैनिक ध्यान, अभ्यास के आधार पर आध्यात्मिकता की एक विधि से सदस्यों का मार्गदर्शन और निर्देशन करता है. 

कोरोना महामारी के समय अपने सहयोग और सेवा के लिए सराहे गए राधा स्वामी सत्संग ब्यास के सभी डेरा प्रमुखों ने सदैव तटस्थ रुख बनाए रखा और किसी भी राजनीतिक दल या उम्मीदवारों का कभी सार्वजनिक रूप से समर्थन नहीं किया. न केवल पंजाब में बल्कि भारत के कई अन्य राज्यों, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में अपने विशाल अनुयायियों के समूह पर डेरा का प्रभाव है, जिसकी वजह से विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता अक्सर डेरा का दौरा करते रहे है.

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