चंपई सोरेन 2024 में तत्कालीन सीएम हेमंत सोरेन के जेल जाने पर दिए गए इस्तीफे के बाद झारखंड के मुख्यमंत्री बने तो उनकी प्रसिद्धि और छवि में बड़ा उछाल आया.
चंपई सोरेन झारखंड मुक्ति मोर्चा के सोरेन परिवार के काफी करीबी माने जाते थे. इसलिए 2024 में हेमंत सोरेन के इस्तीफे के बाद सोरेन परिवार द्वारा हेमंत सोरेन की पत्नी कल्पना मुर्मू सोरेन से ज्यादा उन पर भरोसा दिखाते हुए मुख्यमंत्री बना दिया गया था.
एक सामान्य किसान परिवार से आने वाले चंपई सोरेन चार भाई बहनों में सबसे बड़े हैं. चंपई सोरेन के पिता सरायकेला खरसावां जिले में स्थित जिलिंगगोरा गांव में कभी खेती किया करते थे तो चंपई सोरेन भी अपने पिता की खेती बाड़ी के काम में मदद किया करते थे. स्थानीय सरकारी स्कूल में पढ़ाई करने वाले चंपई सोरेन ने वही से दसवीं पास की. इसी बीच चंपई सोरेन की कम उम्र में ही मानको से शादी हो गई. शादी के बाद उनके 3 बेटे और 2 बेटियां हुईं.
चंपई सोरेन का झारखंड राज्य के निर्माण हेतु चलाये गए आंदोलन में भी बड़ा योगदान रहा है. जब बिहार से एक अलग राज्य झारखंड की मांग तेज हुई और उसके लिए एक आंदोलन शुरू किया गया. तो झारखंड में शिबू सोरेन के साथ चंपई सोरेन भी इस आंदोलन में कूद गये. आंदोलन में चंपई सोरेन की सक्रीय भूमिका ने उन्हें झारखंड टाइगर के नाम से मशहूर कर दिया.
झारखंड आंदोलन के समय ही चंपई सोरेन की राजनीतिक शुरुआत हुई, सन 1991 में सरायकेला विधानसभा सीट से उपचुनाव में निर्दलीय उमीदवार बनकर. इस उपचुनाव में चंपई सोरेन ने विधायक बनकर झारखंड टाइगर के तगमे को मजबूती दे दी. चंपाई सोरेन तत्कालीन बिहार विधानसभा के सदस्य बने क्योंकि तब झारखंड बिहार का ही भाग था. इसके बाद शिबू सोरेन के प्रभाव वाली झारखंड मुक्ति मोर्चा में उन्हें जगह मिली और वह सोरेन परिवार के करीबी बन गए.
सन 1995 में चंपई सोरेन सरायकेला विधानसभा सीट से दोबारा जीतकर विधायक बने. हालांकि सन 2000 के झारखंड विधानसभा चुनाव में वह हार गए जब तत्कालीन भाजपा प्रत्याशी अनंत राम टुडू ने उन्हें शिकस्त दी. मगर 2005 में वापसी करते हुए फिर से विधायक बने, 2009 में भी जीते.
सन 2010 से 2013 के दौरान बीजेपी नेता अर्जुन मुंडा की जे एम एम के सहयोग से बनी 2 साल 129 दिन की बीजेपी सरकार में चंपई सोरेन कैबिनेट मंत्री बने और उन्हें कई अहम मंत्रालय दिए गए. चंपई सोरेन 11 सितंबर 2010 से 18 जनवरी 2013 तक मंत्री रहे इसके यह गठबंधन सरकार टूट गयी और झारखंड में राष्ट्रपति शासन लगा दिया गया. फिर जे एम एम की सरकार बनी तो चंपई सोरेन खाद्य, नागरिक आपूर्ति और परिवहन मंत्री बने, इस बार 13 जुलाई 2013 से 28 दिसंबर 2014 तक चंपई सोरेन मंत्री रहे.
मगर 2014 झारखंड विधानसभा चुनावों में झारखंड मुक्ति मोर्चा को बुरी हार का सामना करना पड़ा और चंपई सोरेन पांच साल के लिए विपक्ष में आ गए. हालांकि इन चुनावों में वह अपनी परम्परागत सीट सरायकेला विधानसभा से जीत गए थे.
फिर जब 2019 में जेएमएम में वापसी करते हुए झारखंड में सरकार बनायी तो हेमंत सोरेन राज्य के मुख्यमंत्री बने और चंपई सोरेन फिरसे मंत्री बने. इस बार चंपई सोरेन परिवहन, अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति और पिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्री बने. इसके साथ ही चंपई सोरेन जेएमएम के उपाध्यक्ष भी बने.
इसी सरकार के अंतिम कालखंड में जब जमीन घोटाला मामले में 2024 में ईडी की जांच के बाद सीएम हेमंत सोरेन ने राज्यपाल को अपना इस्तीफा सौंपा तो, चंपई सोरेन झारखंड के नए मुख्यमंत्री चुने गए. इसी मामले में हेमंत सोरेन को जेल हो गयी थी जिसके बाद वह अगस्त 2024 में जेल से बाहर आये तो फिर से मुख्यमंत्री बन गए.
मगर अब सोरेन परिवार, जेएमएम और चंपई सोरेन के बीच बहुत कुछ बदल चुका था. जेएमएम से कोल्हान के टाइगर चंपई सोरेन का मोह भंग हुआ और वह झारखंड की दूसरी पड़ी पार्टी भाजपा के नजदीक आ गए. उन्होंने जेएमएम से इस्तीफा दिया और बिहार की एक बड़ी रैली में नीतीश कुमार व हिमंत बिस्वा सरमा की मौजूदगी में भारतीय जनता पार्टी ज्वाइन कर ली.