बिंदेश्वर पाठक भारत में मिस्टर सैनिटेशन और द टॉयलेट मैन ऑफ इंडिया जैसे नामों से प्रसिद्ध , एक सामाजिक कार्यकर्त्ता थे. उन्होंने सुलभ इंटरनेशनल नामक सामाजिक संस्था की स्थापना की थी. उन्होंने दुनिया को शौचालय का महत्व समझाया और सुलभ शौचालय को इंटरनेशनल ब्रांड बना दिया.
बिंदेश्वर पाठक का जन्म 2 अप्रैल 1943 को बिहार के वैशाली जिले के रामपुर बघेल गांव में हुआ था. बिंदेश्वर पाठक प्रारंभिक शिक्षा उनके गांव रामपुर में मौजूद गवर्नमेंट स्कूल से हुई थी.
फिर उन्होंने आरडीएस कॉलेज, मुजफ्फरपुर, नेशनल कॉलेज, पटना और पटना यूनिवर्सिटी से पढ़ाई की. बिंदेश्वर पाठक ने सन 1964 में बीएन कॉलेज पटना से सोशियोलॉजी में 54 परसेंट मार्क्स से ग्रजुएशन किया जिसके बाद उनको 14 रुपये की स्कॉलरशिप मिली. बाद में उन्होंने बिहार से 1980 में सोशियोलॉजी में एमए और फिर 1986 में इंग्लिश में पोस्ट ग्रेजुएट किया. बिंदेश्वर पाठक ने साल 1985 में मैला ढोने पर पीएचडी किया और 1994 में डी लिट की डिग्री ली.
पढाई के दिनों में बिंदेश्वर पाठक पटना में अपने चाचा के यहां रहा करते थे. हालांकि यहां उन्हें रहने और खाने का कोई अतरिक्त खर्चा नहीं देना पड़ता था, मगर फिर भी उनके पिता एक्स्ट्रा एक्सपेंसेज के लिए 25 रुपये और भेजते थे.
सबसे पहले उन्होंने एक स्कूल में पढ़ाना शुरू किया जिसके लिए बिंदेश्वर पाठक को 80 रुपये पर मंथ सैलरी मिलती थी. शादी के बाद बिंदेश्वर पाठक ने टीचर की जॉब छोड़कर पतरातू, झारखंड में थर्मल पावर स्टेशन में जॉब की. हालांकि बहुत जल्द ही वह इसे भी छोड़कर मुजफ्फरपुर में पिता के फार्मेसी बिजनेस से जुड़ गए. लेकिन इस काम में भी जब बिंदेश्वर पाठक का मन नहीं लगा तो वह भंगी मुक्ति आंदोलन से जुड़ गए. यहां उन्होंने महात्मा गांधी का गहनता से अध्ययन किया और गांधीवादी सिद्धांत सीखे.
1968-69 में बिहार बिंदेश्वर पाठक को महात्मा गांधी जन्म शताब्दी समारोह समिति में काम करने का अवसर मिला. इस दौरान समिति द्वारा उन्हें सुरक्षित और सस्ती शौचालय तकनीक डेवेलप करने के लिए कहा गया. इसके साथ ही उन्हें पिछड़ों और वंचितों के सम्मान और उत्थान के लिए भी कार्य योजना तैयार करने के लिए भी कहा गया, जिसके द्वारा इन लोगों को मुख्यधारा में शामिल किया जा सके.
लगभग एक साल तक इस विषय पर काम करने के बाद बिंदेश्वर पाठक ने सन 1970 में सुलभ इंटरनेशनल नामक संस्था की स्थापना कर दी. जिसके लिए उन्होंने लगभग 50 हजार रुपये का लोन भी लिया था.
सुलभ इंटरनेशनल में उन्होंने दो गड्ढों वाला फ्लश टॉयलेट डेवलप किया तो साथ ही डिस्पोजल कम्पोस्ट शौचालय का भी आविष्कार किया जिसे कम खर्च में घर के आसपास आसानी से उपलब्ध हो जाने वाले सामान से बनाया जा सकता था. फिर उन्होंने देशभर में सुलभ शौचालय बनाना शुरू कर दिया.
बिंदेश्वर पाठक जब छोटे थे तो उनके घर में 9 कमरे थे, लेकिन एक भी टॉयलेट नहीं था. घर की महिलाएं शौच के लिए जब सुबह जल्दी उठकर बाहर जाती थीं और उनके लिए दिन में बाहर शौच करना मुश्किल होता था. महिलाओं को होने वाली इन समस्याओं को देखकर बिंदेश्वर पाठक काफी बेचैन हो जाते थे. इस समस्या का हल निकालने को ही उन्होंने अपने जीवन का लक्ष्य बना लिया और सुलभ शौचालय की व्यवस्था की स्थापना कर दी.
उस समय एक उच्च जाति के पोस्ट ग्रेजुएट लड़के लिए शौचालय के क्षेत्र में काम करना आसान नहीं था. एक बार उनके पिता इस बात से काफी नाराज हो गए थे. साथ ही दूसरे जानने वाले लोग व रिश्तेदार भी नाराज थे. उनके ससुर भी बिंदेश्वर पाठक को शौचालय वाले काम करते देख काफी नाराज थे. उन्होंने तो बिंदेश्वर पाठक से यह तक कह दिया था कि उन्हें कभी अपना चेहरा मत दिखाना. वह कहने लगे थे कि बिंदेश्वर पाठक ने उनकी बेटी का जीवन खराब कर दिया है.
लेकिन बिंदेश्वर पाठक फिर कभी अपने बुलंद इरादे से पीछे नहीं हटे और लोगों की इन सब बातों का बिंदेश्वर पाठक के पास एक ही जवाब होता था कि वह गांधीजी के सपने को पूरा कर रहे हैं. सभी नकारात्मक और रूढ़िवादी बातों को दरकिनार करते हुए उन्होंने मैला ढोने और खुले में शौच की समस्या पर जबरदस्त काम किया. बिंदेश्वर पाठक आजीवन देश को शौच मुक्त करने की दिशा में काम करते रहे.
बिंदेश्वर पाठक ने सुलभ इंटरनेशनल के माध्यम से लोगों को मानव अधिकारों, पर्यावरण, स्वच्छता, वेस्ट मैनेजमेंट और रिफार्म्स जैसे सोशल विषयों के प्रति जागरूक किया. 1989 में उन्होंने एक बार राजस्थान में मैला ढोने वाले लोगों के परिवारों की 100 लड़कियों से एक मंदिर का नेतृत्व कराया. साथ ही बिंदेश्वर पाठक ने उनके साथ सार्वजनिक रूप से भोजन भी किया था.
लोगों के लिए स्वच्छता की समस्या को हल करना अपने जीवन की प्राथमिकता मानने वाले बिंदेश्वर पाठक इस काम को अपने बेटों और बेटियों से भी ज्यादा प्यार करते थे. सवछता के लिए महात्मा गांधी की सीख से बिंदेश्वर पाठक बहुत प्रभावित थे. उच्च जाति के ब्राह्मण परिवार में जन्मे बिंदेश्वर पाठक कहते थे कि एक बच्चे के रूप में भी वह अपने विशेषाधिकार के बारे में अच्छे से जानते है और जाति व्यवस्था की वजह से होने वाली समस्याएं सदैव मुझे परेशान करती है.
बिंदेश्वर पाठक के इस महान कार्य ने लाखों भारतीयों, विशेष रूप से महिलाओं के जीवन का उत्थान किया. सुलभ से पहले महिलाएं किसी समय भीड़-भाड़ वाले पब्लिक प्लेसेस पर टॉयलेट करने को मजबूर थी. महिलाओं को टॉयलेट जाने के लिए घंटों इंतजार करना पड़ता था.
सन 1974 के बाद से सुलभ इंटरनेशनल ने शहरी झुग्गियों और देश भर में बस स्टैंड, बाजारों, रेलवे स्टेशनों जैसी और दूसरी सार्वजनिक जगहों पर 1.5 मिलियन से भी अधिक शौचालयों का निर्माण किया। जिनका भारत में 20 मिलियन से भी अधिक लोग उपयोग करते हैं. साथ ही सुलभ इंटरनेशनल द्वारा 10,000 से भी ज्यादा पे-एंड-यूज़ शौचालय भी बनाए गए.
बिंदेश्वर पाठक द्वारा दिए गए शुलभ शौचालय के डिजाइन का उपयोग दुनिया के कई देशों में भी किया गया. सुलभ इंटरनेशनल के द्वारा ही 2011 में अफ़ग़ानिस्तान में अमेरीकी सेना के लिए एक स्पेशल टाइप के टॉयलेट्स बनाने की योजना बनाई गयी थी. तब अमेरिकी सेना ने बायो गैस से ऑपरेटेड टॉयलेट्स का निर्माण करने का आग्रह किया था .
बिंदेश्वर पाठक का यह संस्थान सुलभ इंटरनेशनल, सार्वजनिक सुविधाओं के क्षेत्र में पिछले कई दशकों से कार्य कर रहा है. सुलभ इंटरनेशनल ने क़ाबुल में भी शौचालय उपलब्ध करवाये है.
बिंदेश्वर पाठक का मानना था कि मानवता और स्वच्छता ही मेरा धर्म है, अगर आपने किसी मनुष्य की सहायता नहीं की है, तो आपने अभी तक ईश्वर से सच्ची प्रार्थना नहीं की है.
स्वच्छता और साफ-सफाई के क्षेत्र सामाजिक सुधारों में बिंदेश्वर पाठक का विशेष योगदान रहा. सुभल इंटरनेशनल संगठन के जरिये किये गए उनके कार्यों और उन्हें विभिन्न राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित किया गया.
बिंदेश्वर पाठक को 1991 में भारत सरकार द्वारा पद्म भूषण पद से सम्मानित किया. साथ ही उन्हें डॉ एपीजे अब्दुल कलाम अवार्ड, गुड कार्पोरेट सिटिजन अवार्ड, एनर्जी ग्लोब अवार्ड, डब्ल्यूएचओ पब्लिक हेल्थ कैपेन अवार्ड और गांधी शांति पुरस्कार जैसे अनेको पुरुस्कार दिए जा चुके है.
15 अगस्त 2023 को बिंदेश्वर पाठक ने सुलभ इंटरेशनल के मुख्यालय में ने झंडोत्तोलन किया, तब वह बिलकुल स्वस्थ थे, लेकिन फिर अचानक उन्हें कुछ प्रॉब्लम फील हुई तो उन्हें एम्स ले जाया गया जिसे डॉक्टर्स ने काफी क्रिटिकल बताया. फिर कार्डियक अरेस्ट से लगभग दो बजे उनका निधन हो गया.